1G (1st Generation):
यह मोबाइल संचार की पहली पीढ़ी है जिसका शुरुआत 1980 के दशक में अमेरिका में हुआ था।
• 2.4 kbps तक की स्पीड
• आवाज की गुणवत्ता
• सीमित बैटरी के साथ बड़े फोन
• डाटा की कोई सुरक्षा नहीं
2G (2nd Generation):
यह मोबाइल संचार की दूसरी पीढ़ी है जिसका शुरुआत 1991 में फिनलैंड में हुआ था।
• 64 kbps तक की स्पीड
• टेक्स्ट और मल्टीमीडिया मैसेज भेजना संभव
• 1G से बेहतर गुणवत्ता
3G (3rd Generation):
यह मोबाइल संचार की तीसरी पीढ़ी है जिसका शुरुआत 1998 में जापान में हुआ था।
• 144 kbps से 2 mbps तक की स्पीड
• हाई स्पीड वेब ब्राउजिंग
• वीडियो कांफ्रेंसिंग, मल्टीमीडिया मेल, जैसे वेब एप्लीकेशन का चल पाना
• ऑडियो और वीडियो फाइल का एक दूसरे के साथ आदान प्रदान
• 3D गेमिंग
4G (4th Generation):
यह मोबाइल संचार की चौथी पीढ़ी है जिसका शुरुआत 2011 में हुआ था।
• 1 mbps से 100 mbps तक की स्पीड
• मोबाइल वेब का उपयोग
• हाई डेफिनिशन मोबाइल टीवी
• क्लाउड कम्प्यूटिंग
• आईपी टेलिफोनी
ये तो था 1G से लेकर 4G तक का सफर, जिसको हमलोगों ने संक्षेप में जाना। आज हमलोग 5G के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे।
[ इसे भी पढ़ें: क्या होता है वेब या वेबसाइट और यह कितने प्रकार का होता है? आइए जानते है डिटेल्स में... ]
5G इन सभी जेनरेशंस का अपग्रेडेड वर्जन है, यानी की इस 5G से ऐसा नेटवर्क तैयार होने वाला है जहां हर कोई चीज एक दूसरे से वर्चुअली कनेक्ट होने वाला है चाहे वह मशीन हो या कोई दूसरा डिवाइसेज।
5G के जरिए कनेक्टिविटी की स्पीड बहुत हीं तेज हो जाएगी और 10 gbps की स्पीड से कुछ भी डाउनलोड कर सकेंगे। इसमें लेटेंसी (समय की बिलंब) बेहद कम होगी और नेटवर्क कैपेसिटी ज्यादा होगी। यहाँ पर स्पीड, काम करने की क्षमता और लेटेंसी (समय की बिलंब) के आलावा 5G, नेटवर्क मैनेजमेंट फीचर्स भी प्रदान करती है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशंस (DoT) ने कुछ दिन पहले 5G ट्रायल स्पेक्ट्रम अलॉट कर दिया है। इससे रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) के लिए रास्ता साफ हो गया है। जियो और एयरटेल के पास पहले से ही 5G तैयार नेटवर्क्स हैं।
5G टेक्नोलॉजी के विशेषताएं (Features of 5G Technology In Hindi):
अब हम 5G टेक्नोलॉजी के कुछ विशेषताओं के बारे में जानेंगे जो अभी के मौजूदा नेटवर्क टेक्नोलॉजी में नहीं है।
• 10 gbps का डाटा रेट जो अभी तक के 4G aur 4.5G नेटवर्क में नहीं है।
• 1 मिलिसेकंड का लेटेंसी का प्रदान होगा।
• 100% नेटवर्क कवरेज होगा।
• यह एनर्जी सेव करने में काफी मदद करता है जिसके कारण नेटवर्क एनर्जी यूसेज 90% तक कम हो जायेगा।
• इसकी क्षमता ज्यादा होने से यह ज्यादा डिवाइसेज को एक साथ कनेक्ट कर पायेगी।
• यह बैटरी की खपत कम करेगी।
• यह किसी भी एरिया में बेहतर कनेक्टिविटी प्रोवाइड करेगी।
• इसके कम्युनिकेशन में ज्यादा रिलियाबिलिटी (Reliability) होगी।
• इसके कारण पूरी दुनिया एक Wi-Fi Zone बन जायेगी।
5G टेक्नोलॉजी काम कैसे करता है (How To Work 5G Technology In Hindi):
वायरलेस नेटवर्क्स (Wireless Networks) में मुख्य रूप से सेल साइट्स होते है जिन्हे सेक्टर्स में डिवाइड किया गया रहता है जो रेडियो वेव के माध्यम से एक जगह से दूसरे जगह डाटा सेंड करते है। पहले का 4G-LTE (4th Generation - Long Term Evolution) ही ने 5G का स्तंभ रखा जिसमे बहुत सारा अपडेट किया गया है। 4G में ज्यादा दूरी को कवर करने के लिए बहुत बड़े-बड़े और बहुत ज्यादा पावर वाले टावर्स का जरूरत होता है जबकि 5G को स्मॉल सेल स्टेशन यानी की छोटी-छोटी जगह जैसे बिजली के खंभे या घर के छतों में लगाया जा सकता है।
5G नेटवर्क्स 3400 MHz , 3500 MHz और 3600 MHz बैंड्स (Bands) पर काम करते हैं। 3500 MHz बैंड को आइडल (Ideal) माना जाता है। मिलीमीटर वेव स्पेक्ट्रम 5G में अहम भूमिका निभा सकता है। इन्हें मिलीमीटर वेव्स (Waves) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी लेंथ 1 से 10 mm होती है। मिलीमीटर तरंगें 30 से 300 GHz फ्रिक्वेंसीज़ पर काम करती हैं। अभी तक इन तरंगों को सैटलाइट नेटवर्क्स और रडार सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जाता था।
क्या 5G इंसान और धरती के लिए खतरा साबित हो सकता है ?
5G के जरिए कनेक्टिविटी की स्पीड बहुत हीं तेज हो जाएगी और 10 gbps की स्पीड से कुछ भी डाउनलोड कर सकेंगे। इसमें लेटेंसी (समय की बिलंब) बेहद कम होगी और नेटवर्क कैपेसिटी ज्यादा होगी। यहाँ पर स्पीड, काम करने की क्षमता और लेटेंसी (समय की बिलंब) के आलावा 5G, नेटवर्क मैनेजमेंट फीचर्स भी प्रदान करती है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशंस (DoT) ने कुछ दिन पहले 5G ट्रायल स्पेक्ट्रम अलॉट कर दिया है। इससे रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) के लिए रास्ता साफ हो गया है। जियो और एयरटेल के पास पहले से ही 5G तैयार नेटवर्क्स हैं।
5G टेक्नोलॉजी के विशेषताएं (Features of 5G Technology In Hindi):
अब हम 5G टेक्नोलॉजी के कुछ विशेषताओं के बारे में जानेंगे जो अभी के मौजूदा नेटवर्क टेक्नोलॉजी में नहीं है।
• 10 gbps का डाटा रेट जो अभी तक के 4G aur 4.5G नेटवर्क में नहीं है।
• 1 मिलिसेकंड का लेटेंसी का प्रदान होगा।
• 100% नेटवर्क कवरेज होगा।
• यह एनर्जी सेव करने में काफी मदद करता है जिसके कारण नेटवर्क एनर्जी यूसेज 90% तक कम हो जायेगा।
• इसकी क्षमता ज्यादा होने से यह ज्यादा डिवाइसेज को एक साथ कनेक्ट कर पायेगी।
• यह बैटरी की खपत कम करेगी।
• यह किसी भी एरिया में बेहतर कनेक्टिविटी प्रोवाइड करेगी।
• इसके कम्युनिकेशन में ज्यादा रिलियाबिलिटी (Reliability) होगी।
• इसके कारण पूरी दुनिया एक Wi-Fi Zone बन जायेगी।
5G टेक्नोलॉजी काम कैसे करता है (How To Work 5G Technology In Hindi):
वायरलेस नेटवर्क्स (Wireless Networks) में मुख्य रूप से सेल साइट्स होते है जिन्हे सेक्टर्स में डिवाइड किया गया रहता है जो रेडियो वेव के माध्यम से एक जगह से दूसरे जगह डाटा सेंड करते है। पहले का 4G-LTE (4th Generation - Long Term Evolution) ही ने 5G का स्तंभ रखा जिसमे बहुत सारा अपडेट किया गया है। 4G में ज्यादा दूरी को कवर करने के लिए बहुत बड़े-बड़े और बहुत ज्यादा पावर वाले टावर्स का जरूरत होता है जबकि 5G को स्मॉल सेल स्टेशन यानी की छोटी-छोटी जगह जैसे बिजली के खंभे या घर के छतों में लगाया जा सकता है।
5G नेटवर्क्स 3400 MHz , 3500 MHz और 3600 MHz बैंड्स (Bands) पर काम करते हैं। 3500 MHz बैंड को आइडल (Ideal) माना जाता है। मिलीमीटर वेव स्पेक्ट्रम 5G में अहम भूमिका निभा सकता है। इन्हें मिलीमीटर वेव्स (Waves) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी लेंथ 1 से 10 mm होती है। मिलीमीटर तरंगें 30 से 300 GHz फ्रिक्वेंसीज़ पर काम करती हैं। अभी तक इन तरंगों को सैटलाइट नेटवर्क्स और रडार सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जाता था।
[ इसे भी पढ़ें: "इंटरनेट की काली दुनियां" यानी कि डार्क वेब क्या है और कैसे काम करता है (What Is Dark Web In Hindi) ? ]
क्या 5G इंसान और धरती के लिए खतरा साबित हो सकता है ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 5G से जो एक्सपोजर होता है, वह 3.5 GHz के बराबर होता है। यह अभी के मोबाइल बेस स्टेशन के बराबर ही है। WHO ने अपने वेबसाइट में बताया है की अभी यह तकनीक विकसित हो रही है, ऐसे में और रिसर्च होनी चाहिए। लेकिन अभी तक की रिसर्च में वायरलेस तकनीकों का सेहत पर कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है। WHO की 5G पर राय आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
इतना ही नहीं, भारत के मशहूर टेक एक्सपर्ट और IIT कानपुर के डायरेक्टर अभय करंदीकर ने भी बताया कि RF रेडिएशंस से स्वास्थ्य पर किसी तरह के दुष्प्रभाव की बात किसी रिसर्च में सामने नहीं आए हैं। उनके मुताबिक 5G को अलग-अलग स्पेक्ट्रम बैंड्स में तैनात किया जाएगा जिसमे हाई फ्रीक्वेंसी रेंज वाले बैंड्स की कवरेज छोटी होगी और उनकी रेडिएशन पावर भी सीमा के भीतर होगी। करंदीकर के मुताबिक, 5G से सेहत को लेकर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है।
कुछ दिन पहले 5G टावरों की टेस्टिंग को लेके सोशल मीडिया से लेकर कई न्यूज चैनलोंं पर एक अफवाह फैली थी कि इन 5G टावरों की टेस्टिंग के कारण हीं कोरोना वायरस की दूसरी लहर आई है, और यह मेसेज भी खूब वायरल हुआ था। उस मैसेज में कहा गया था कि 5G से इंसान और जानवर खत्म हो जाएंगे जबकि इस दावे में कोई दम नहीं था। WHO और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसी किसी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। दोनों ने साफ कहा कि 5G का कोविड-19 से कोई लेना-देना नहीं है।
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धन्यवाद !!
